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SUMMARY:Shri Kumarpal Raja Charitra
DESCRIPTION:Sanskar Shakti presents the most awaiting session \n🆂🅷🆁🅸 🅺🆄🅼🅰🆁🅿🅰🅻 🆁🅰🅹🅰 🅲🅷🅰🆁🅸🆃🆁🅰 \n💠जिनशासन ने जिनको “परमार्हत ” की पदवी दी है ।\n💠जिनकी जीवदया की प्रशंसा श्रमण भगवान महावीर ने स्वयं समवसरण में श्रेणिक महाराजा के सामने की ।\n💠कलिकाल सर्वज्ञ जैसे गुरु जिनको प्राप्त हुए\n💠जिनको केवल 5 कोडी की पुष्प पूजा के कारण 18 देशों का आधिपत्य प्राप्त हुआ । \n💠जिन्होंने अपना जीवन तीर्थ रक्षा \, जीव रक्षा \, संस्कृति रक्षा से अलंकृत किया ।\n💠जिन्होंने 18 देशों में जुगार एवं कतलखाने बंध करवाया इतना ही नहीं मार शब्द पर भी प्रतिबंध था ।\n💠जिन्होंने अपने जीवन के उत्तरार्ध में उत्तम श्रावक जीवन जीया \, इतना ही नहीं\n💠बड़ी उम्र में धर्मा प्राप्ति के बाद जिन्होंने संस्कृत साहित्य की रचना भी की । \nपता चल ही गया होगा कि हम किसकी बात कर रहे हैं👉 \n जी हां हम गुर्जरेश्वर \, त्रिभुवनपाल के पुत्र \, चौलुक्य (सोलंकी) वंश के कुल भूषण कुमारपाल राजा की ही बात कर रहे हैं आप सब को इनका चरित्र जानना है तो अवश्य तैयार रहे । \nSpeaker : Truptiben Maniar \n🔴Only for full course pregnant mothers🔴
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